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आइये मनाएं संविधान दिवस - जानें अपने मौलिक कर्त्तव्य और अधिकार!

आज संविधान दिवस है।  इस दिन का विशेष महत्त्व है क्यूंकि इसी दिन वर्ष 1949 में भारत के संविधान को अपनाया गया था। संविधान दिवस को पहली बार वर्ष 2015 में बाबा साहब आंबेडकर के 125 वें जन्मदिवस पर मनाने का फ़ैसला लिया गया ।  इंडियन कॉन्स्टिटूशन डे मनाने का मुख्य उद्देश्य देश की नई पीढ़ी को अपने संविधान को जानने, समझने, और सीखने के लिए प्रेरित करना है ताकि वो देश की तरक़्क़ी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।  और अपने 6  मौलिक अधिकारों और 11 मौलिक कर्तव्यों के प्रति जागरुक हो सकें। 

भारतीय संविधान के भाग-3 में अनुच्छेद 12 से 35 के बीच देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों को बताया गया है:

  1. समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से 18 तक)
  2. स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19 से 22 तक)
  3. शोषण के ख़िलाफ़ अधिकार (अनुच्छेद 23 से 24 तक)
  4. धार्मिक आज़ादी का अधिकार (अनुच्छेद 25 से 28 तक)
  5. सांस्कृतिक और शिक्षा से जुड़े अधिकार (अनुच्छेद 29 से 30 तक)
  6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)

 

भारतीय  नागरिकों के 11 मौलिक मौलिक कर्त्तव्य

संविधान का अनुच्छेद

प्रावधान

51A (a)

संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों और संस्थानों, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना।

51 A (b)

उन महान आदर्शों को संजोना और उनका पालन करना, जिन्होंने हमें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरित किया।

51 A (c)

भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखना और उसकी रक्षा करना।

51 A (d)

देश की रक्षा करना और जरूरत पड़ने या कहे जाने पर राष्ट्रीय सेवाएं प्रदान करना।

51 A (e)

भारत के सभी लोगों के बीच धार्मिक, भाषाई और क्षेत्रीय या अनुभागीय विविधताओं से परे सद्भाव और समान भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना; महिलाओं के सम्मान के लिए अपमानजनक प्रथाओं का त्याग करना।

51 A (f)

हमारी मिली-जुली संस्कृति की समृद्ध विरासत को महत्व देना और उसका संरक्षण करना।

51 A (g)

वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण को महत्व देना, उसकी रक्षा करना और उसमें सुधार करना और जीवित प्राणियों के प्रति दयाभाव रखना।

51 A (h)

वैज्ञानिक सोच, मानवतावाद, जांच और सुधार की भावना का विकास करना।

51 A (i)

सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और हिंसा से दूर रहना।

51 A (j)

व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधि के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता की दिशा में प्रयास करना ताकि राष्ट्र निरंतर प्रयास और उपलब्धि के उच्च स्तर तक पहुंचे।

51 A (k)

माता-पिता या अभिभावक का अपने बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का कर्तव्य, छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच (86वें संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया) के मामलों में।

 

कैसा है हमारा संविधान?

गौरतलब है कि भारत का संविधान दुनिया का सबसे लम्बा लिखा गया दस्तावेज है, जिसमे 25 भाग, 251  पन्ने, 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां, और  ।,45,000 शब्द हैं।  इसे लिखने में 2  साल, 11  महीने और 18 दिन लगा है। इसे भारतीय संसद के पुस्कालय में विशेष हीलियम से भरे  बक्से में रखा गया है। 

किसने डाली है इसमें जान ?

आपको बता दें कि इसकी पाण्डुलिपि अपने हाथों से अंग्रेज़ी में लिखने वाले थे प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा।  अम्बेडकर के संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्यक्ष होने के नाते उन्हें संविधान का शिल्पकार बुलाया जाता है। भारतीय संविधान को हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओँ में लिखा गया है। 

मानें अपने कर्त्तव्य और अधिकार - बनाएं बेहतर कल का आधार!

अगर हम सही मायने में अपने कर्तव्यों और अधिकारों को जानें और मानें, तभी हम एक ज़िम्मेदार नागरिक कहलायेंगे और अपने देश , समाज, परिवार, और स्वयं में सही परिवर्तन ला पाएंगे।  साथ ही अपने देश, समाज, परिवार, और अपने आप को भी बेहतर बना पाएंगे ।