अनमोल 'रतन' का दुनिया को 'टाटा', पंचतत्व में विलीन हुए रतन टाटा
journo sam, October 10, 2024MUMBAI : देश के दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा अपनी अंतिम यात्रा पर चल पड़े हैं। टाटा की अंतिम सांस की खबर के बाद से पूरे हिंदुस्तान की आंखे नम हो गईं। वहीं बात अगर मुबंई शहर की करें तो भारत रतन टाटा की सांसे थमने के बाद माया नगरी में मातम छा गया। टाटा की एक झलक देखने को लोगों की भीड़ उमड़ी हुई है। तस्वीरें इस बात की गवाह हैं देश की आवाम रतन टाटा से कितना प्यार करती थी। कोलाबा स्थित टाटा के आवास से लेकर NCPA तक लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। टाटा के अंतिम दर्शन के लिए कई कारोबारी, राजनीतिक, खेल, और मनोरंजन जगत के बड़े चेहरे भी पहुंचे।
रतन टाटा के बारे में जानिए
रतन टाटा का पूरा नाम रतन नवल टाटा था। टाटा जमशेदजी टाटा के परपोते थे। जिन्होंने टाटा समूह की नींव रखी थी। उनका जन्म 28 दिसंबर, 1937 को मुंबई में नवल टाटा और सूनी टाटा के घर हुआ था। 1948 में उनके माता-पिता के अलग हो जाने के बाद रतन टाटा का पालन-पोषण उनकी दादी नवाजबाई टाटा ने किया। जानकारी के मुताबिक चार मौकों पर शादी के करीब आने के बावजूद रतन टाटा ने कभी शादी नहीं की। उन्होंने एक बार स्वीकार किया था कि लॉस एंजिल्स में काम करने के दौरान उन्हें प्यार हो गया था। लेकिन टाटा के प्यार की दुश्मन बन गई शरहद की सीमा। बता दें कि साल 1962 के भारत-चीन युद्ध के कारण एंजिल्स के माता-पिता ने उसे भारत आने से रोक दिया। जिसके बाद टाटा ने शादी नहीं की।
दरियादिली के मामले में भी रतन टाटा का कोई सानी नहीं
भारत के सबसे सफल कारोबारियों में से एक होने के साथ-साथ वह अपनी परोपकारी गतिविधियों के लिए भी जाने जाते थे। परोपकार में उनकी व्यक्तिगत भागीदारी बहुत पहले ही शुरू हो गई थी। वर्ष 1970 के दशक में उन्होंने आगा खान अस्पताल और मेडिकल कॉलेज परियोजना की शुरुआत की । जिसने भारत के प्रमुख स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में से एक की नींव रखी। वहीं अगर बात रतन टाटा की दरियादिली की की जाए तो जब वह जिंदा रहे तब तक देश का कोई कारोबारी उनका सामना नहीं करता दिखाई देता। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने पीएम केयर्स फंड में 500 करोड़ की बड़ी राशि दान की थी।