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किस केस में राजा भैया को मिली क्लीन चिट, आखिर 11 साल बाद मिली राहत

PRATAP GARH : उत्तर प्रदेश पुलिस ऑफिसर जियाउल हक कांड के 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। बता दें कि 2013 में हुआ डीएसपी जियाउल हत्या कांड की सुनवाई करीब 11 साल बाद हुई है। जिसमें कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। जिसमें रामलखन गौतम, पवन यादव, फूलचंद यादव, मंजीत यादव, घनश्याम सरोज और अन्य पर सीबीआई कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों पर 19,500 का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने जुर्माने की आधी रकम को जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद को देने का आदेश दिया है।

दस आरोपी दोषी करार

सीबीआई के वकील के.पी. सिंह ने बताया कि यह घटना 2 मार्च 2013 की है। बलीपुर गांव में प्रधान के परिजनों और समर्थकों ने मिलकर कुंडा के सीओ जियाउल हक की हत्या कर दी थी। इसके बाद मामले की जांच सीबीआई ने की और इसके बाद दोषियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। सीबीआई कोर्ट ने 4 अक्टूबर को जियाउल हक हत्याकांड मामले की सुनवाई की। जिसमें सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। आज कोर्ट का फैसला आया है। सभी आरोपियों को धारा 302 और 149 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही हर एक आरोपी पर 19,500 रुपये की धनराशि का जुर्माना भी लगाया गया है। इस जुर्माने की आधी रकम जियाउल हक की पत्नी को दी जाएगी।”

राजा भैया पर लगे थे आरोप

जियाउल हत्या कांड के मामले में कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया पर भी आरोप लगे थे। राजा भैया के अलावा उनके करीबी गुलशन यादव का भी नाम सामने आया था। बाद में उन्हें क्लीन चिट दे गई थी।

मात-पिता को अब क्या रह गया मलाल

जियाउल हक के अब्बू शमशुल हक और उनकी अम्मी हाजरा खातून ने मीडिया को बताया कि वो सीबीआई कोर्ट के फैसले से संतुष्ट हैं। लेकिन जिसने इस पूरी वारदात का चक्रव्यूह रचा उसके बचने का मलाल है।

इसके बाद इस हत्याकांड में कुंडा विधायक राजा भैया को क्लीन चिट दिए जाने पर पिता शमशुल हक ने कहा कि मुलजिम तो राजा भैया और गुलशन यादव ही थे। लेकिन पता नहीं कैसे राजा भैया को क्लीन चिट मिल गई। सीबीआई ने लीपापोती कर दी या फिर किसी और ने लेकिन इस घटना का पूरा चक्रव्यूह उन्हीं का रचा हुआ था। उन्होंने ही हत्या कराई।

क्या था पूरा मामला?

बता दें कि 2 मार्च 2013 को यूपी के प्रतापगढ़ जिले के बलीपुर गांव में ग्राम प्रधान नन्हें यादव की हत्या के बाद वहां हालात बिगड़ गए थे। जहां वारदात की जानकारी मिलने पर डीएसपी जियाउल हक जब गांव पहुंचे, तो भीड़ ने उन पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। और उन्हें बेरहमी से पीटने के बाद गोली मार दी। वहीं इस हमले में उनके साथ आए अन्य पुलिसकर्मी भाग गए थे। लेकिन डीएसपी जियाउल हक मौके पर ही डटे रहे और उनकी जान चली गई।