सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सीएम केजरीवाल को दी राहत, मिली जमानत
journo sam, September 13, 2024SUPREME COURT: सुप्रीम कोर्ट ने आबकारी नीति घोटाले मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दो याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने आबकारी नीति भ्रष्टाचार मामले में केजरीवाल को नियमित जमानत देने का फैसला सुनाया। इस संबंध में न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने उनके फैसले पर सहमति जताई है। कोर्ट ने सीएम केजरीवाल को 10 लाख रुपये के मुचलके और दो जमानत राशियों पर जमानत दी है। वहीं सीबीआई की गिरफ्तारी से जुड़ी याचिका पर जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि अपीलकर्ता की गिरफ्तारी अवैध नहीं थी। ईडी मामले में दिल्ली सीएम को सुप्रीम कोर्ट से 12 जुलाई को जमानत मिली थी। ऐसे में अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने 103 दिन पहले यानी 2 जून को अंतरिम जमानत की मियाद पूरी होने के बाद सरेंडर किया था। जानकारी के मुताबिक केजरीवाल आज ही जेल से बाहर आ सकते हैं।
बता दें कि, केजरीवाल ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में अपनी गिरफ्तारी और जमानत से दिल्ली हाईकोर्ट के इनकार को चुनौती देते हुए दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। अदालत ने पांच सितंबर को केजरीवाल की याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। सीबीआई ने इस मामले में आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो को 26 जून को गिरफ्तार किया था।
जमानत देने का फैसला सुनाया
उन्होंने कहा कि जमानत पर हमने विचार किया। मुद्दा स्वतंत्रता का है। किसी को लंबे समय तक कारावास आजादी से अन्याय के बराबर है। फिलहाल हमें ऐसा लगता है कि केस का नतीजा जल्द निकलने की संभावना नहीं है। सबूतों और गवाहों से छेड़छाड़ को लेकर आरोपी पक्ष की आशंकाओं पर विचार किया गया। उन्हें खारिज करते हुए हमने निष्कर्ष निकाला है कि अपीलकर्ता को जमानत दी जानी चाहिए।
कोर्ट की शर्तें
कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता मामले में कोई भी सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं करेगा। ईडी मामले में लगाई गई सभी शर्तें इस मामले में भी लागू होंगी। वह ट्रायल कोर्ट की पूरी मदद करेगा।
जस्टिस भुइयां ने सीबीआई की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए
फैसला सुनाते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा कि गिरफ्तारी की जरूरत और वक्त पर मेरा एक निश्चित दृष्टिकोण है। इसलिए मैं इस दृष्टिकोण से पूर्णतह सहमत हूं कि अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए। ऐसा लगता है कि ईडी मामले में अपीलकर्ता को नियमित जमानत दिए जाने के बाद ही CBI सक्रिय हुई और हिरासत की मांग की। ईडी मामले में रिहाई के वक्त केजरीवाल को गिरफ्तार करने की सीबीआई की जल्दबाजी समझ से परे है। लेकिन 22 महीने तक उसने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया। इस तरह की कार्रवाई गिरफ्तारी पर गंभीर सवाल उठाती है।
भुइयां ने ईडी पर उठाए सवाल
बता दें कि न्यायमूर्ति भुइयां ने सीबीआई द्वारा केजरीवाल को गिरफ्तार किए जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि एजेंसी का उद्देश्य ईडी मामले में उन्हें जमानत दिए जाने में बाधा डालना था। भुइयां ने ये भी कहा कि सहयोग न करने का मतलब आत्म-दोषारोपण नहीं हो सकता। सीबीआई को ऐसी धारणा से बचना चाहिए कि वह पिंजरे में बंद तोता है। उसे दिखाना चाहिए कि वह पिंजरे का तोता नहीं है। न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि सीबीआई केजरीवाल के गोलमोल जवाबों का हवाला देकर गिरफ्तारी को उचित नहीं ठहरा सकती और ना ही हिरासत में रख सकती। जब केजरीवाल को जमानत मिल गई है तो उन्हें हिरासत में रखना न्याय की दृष्टि से सही नहीं होगा।
आरोपी को बयान देने के लिए नहीं कर सकते मजबूर
न्यायमूर्ति ने कहा कि जहां तक गिरफ्तारी के आधारों का सवाल है तो ये गिरफ्तारी की आवश्यकता को पूरा नहीं करते हैं। सीबीआई केजरीवाल की गिरफ्तारी को उचित नहीं ठहरा सकती है और ना ही टालमटोल वाले जवाबों का हवाला देते हुए हिरासत जारी रख सकती है। वहीं उन्होंने कहा कि ना ही आरोपी को दोषपूर्ण बयान देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इन आधारों पर अपीलकर्ता को हिरासत में रखना न्याय का उपहास है। खासकर तब जब उसे अधिक कठोर Prevention of laundering Act में जमानत दी गई है।