पूर्व ट्रेनी -IAS पूजा खेडकर का दावा, UPSC को नहीं चयन रद्द करने का अधिकार, दिल्ली हाई कोर्ट से लगाई गुहार
सचिन मुखी, August 30, 2024
DELHI HIGHCOURT; आईएएस ट्रेनी अधिकारी पूजा खेड़कर फिर से एक बार चर्चा का विषय बनी हुई हैं। बता दें कि पूजा ने अब दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। जिसमें उन्होंने अदालत से अनुरोध करते हुए कहा है कि जो परीक्षा उन्होंने दिव्यांग श्रेणी में दी थी उसी को उचित माना जाए। बता दें कि पूजा यूपीएससी की 12 परीक्षा दे चुकी हैं। जिसमें से वह दिव्यांग कोटे से आईएएस बनी थीं। वहीं खेड़कर ने दावा किया है कि उनका नाम और सरनेम नहीं बदला गया है।
12 प्रयासों में से सात को नजरअंदाज करें
खेडकर ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट से अनुरोध किया है। जिसमें उन्होंने सिविल सेवा प्रवेश परीक्षा पास करने के उनके 12 प्रयासों में से सात को नजरअंदाज करने की बात कही है। खेडकर ने विशेष रूप से शारीरिक अक्षमता के दावों पर जोर देते हुए कहा है कि, उनके पास महाराष्ट्र के एक अस्पताल का प्रमाण पत्र है। जिसमें उनके बाएं घुटने में अस्थिरता के साथ पुरानी एसीएल (एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट) का इलाज किया गया था। इसलिए उन्होंने कहा कि केवल 'दिव्यांग' श्रेणी में किए गए प्रयासों को ही गिना जाना चाहिए।
40 प्रतिशत मानक के मुकाबले 47 प्रतिशत दिव्यांगता का दावा
पूजा खेडकर ने शुक्रवार सुबह दायर एक हलफनामे में लिखा है कि अदालत सामान्य श्रेणी की छात्रा के रूप में उनके सात प्रयासों को नजर अंदाज करे। यदि इसे स्वीकार कर लिया जाता है तो पुष्टि किए गए प्रयासों की संख्या घटकर पांच हो जाएगी (जिनमें से हर किसी में वह पास हुई)। यह दिव्यांगों के लिए ऊपरी सीमा से चार कम है और सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए दी गई ऊपरी सीमा से एक कम है।
नाम और सरनेम में बदलाव
बता दें कि, पूजा खेडकर उस वक्त चर्चाओं में आ गई थीं। जब उन पर शारीरिक और मानसिक दिव्यांगता के बारे में झूठ बोलने और परीक्षा पास करने के लिए अपना नाम और सरनेम बदलने के साथ-साथ ओबीसी प्रमाण पत्र बनाने का आरोप लगा था। इस पूरे मामले का खुलासा जून में हुआ था। दिल्ली हाईकोर्ट खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा है। जिसमें पूजा जालसाजी और धोखाधड़ी सहित आपराधिक मामलों का सामना कर रही हैं। शहर की एक अदालत ने एक अगस्त को उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
पांच सितंबर तक नहीं किया जाएगा गिरफ्तार
कुछ दिनों बाद पूजा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और पुलिस से भी उसकी याचिका पर नए सिरे से जवाब दाखिल करने को कहा गया। वहीं अदालत ने अंतिम फैसला आने तक गिरफ्तार न करने को कहा है। यह सुरक्षा गुरुवार तक लागू रहेगी।
बीच का नाम बदला गया - खेडकर
वहीं दूसरी ओर, यूपीएससी ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि खेडकर ने धोखाधड़ी की है। लेकिन इस बीच खेडकर ने यूपीएससी के उस दावे को भी खारिज कर दिया है। जिसमें कहा गया कि पूजा खेडकर ने 12 प्रयासों में से एक के लिए अपना नाम और सरनेम बदल लिया था। वहीं उन्होंने दावा किया कि सिर्फ उनके बीच का नाम बदला गया है। इसलिए इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है कि मेरे नाम में बड़ा बदलाव हुआ है। पूजा ने कहा, 'यूपीएससी ने बायोमेट्रिक डेटा के जरिए मेरी पहचान सत्यापित की। मुझे मेरे दस्तावेज फर्जी या गलत नहीं लगे।'
UPSC के पास नहीं चयन रद्द करने का अधिकार
पूजा खेडकर ने यह भी दावा किया है कि यूपीएससी ने उनका चयन रद्द कर दिया है। जबकि उनके पास ऐसा करने का अधिकार नहीं है। क्योंकि उन्हें पहले ही एक परिवीक्षाधीन अधिकारी के रूप में चुना और नियुक्त किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि केवल केंद्र सरकार, विशेष रूप से कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को ही कार्रवाई करन का अधिकार है।