अभिनेत्री कंगना की इमरजेंसी के खिलाफ जिला अदालत में याचिका दर्ज, सिखों की छवि खराब करने का आरोप
सचिन मुखी, August 31, 2024
चंढीगढ़| बॉलीवुड एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनौत के खिलाफ जिला अदालत में याचिका दर्ज कर खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। याचिका में एसएसपी चंडीगढ़ को कंगना के खिलाफ एफआईआर निर्देश की जाने की मांग की है। याचिका पर अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
सिखों की छवि दिखाई खराब
जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट रविंदर सिंह बस्सी अभिनेत्री कंगना के खिलाफ याचिका दर्ज की है। बता दें कि कंगना रनौत की नई फिल्म इमरजेंसी छह सितंबर को रिलीज हो रही है, जो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर आधारित है। कंगना रनौत की अगले महीने इमरजेंसी फिल्म रिलीज हो रही है। जिसका ट्रेलर भी जारी हो चुका है। इस फिल्म के जरिए कंगना ने सिखों की छवि खराब करने की कोशिश की है। कंगना ने बिना इतिहास को पढ़े सिखों की नकारात्मक छवि दिखाई और झूठे आरोप भी लगाए हैं। इसलिए उन्होंने कंगना के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की है। याचिका में कंगना रनौत समेत स्क्रीन प्ले राइटर रितेश शाह और ज़ी स्टूडियो प्रतिवादी बनाया गया है।
सिखों की मांग विवादित सीन फिल्म से हटाए जाएं।
मोहाली के दो लोगों ने चार दिन पहले हाईकोर्ट में दर्ज की थी याचिका बीते मंगलवार को भी फिल्म इमरजेंसी की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करते हुए मोहाली निवासी गुरिंदर सिंह व गुरमोहन सिंह ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। दोनों ने याचिका में कहा था कि इस फिल्म में सिखों को गलत तरीके से पेश किया गया है। यदि फिल्म ऐसे ही रिलीज हुई तो इससे सिखों की भावनाएं आहत होंगी। फिल्म जानबूझकर सिखों की छवि खराब करने के इरादे से बनाई है। उन्होंने मांग की है कि फिल्म की रिलीज से पहले एक्सपर्ट्स का पैनल बनाया जाए। जिसमें एसजीपीसी के सदस्य शामिल हों। उन्हें फिल्म दिखाई जाए और विवादित सीन फिल्म से काटे जाएं। उसके बाद ही उसे रिलीज किया जाए।
बता दें कि सांसद कंगना रानौत अपने बयानों की वजह से आजकल मीडिया की सुर्खियों में बनी हुई हैं। हाल ही में कंगना ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा है कि कांग्रेस मेरे लिए हमेशा से एक डरावनी पार्टी रही है। पार्टी पर परिवारवाद हमेशा से हावी रहा है।
क्या है पूरा मामला?
वहीं कंगना रानौत की एक फिल्म भी रिलीज होने वाली है। जिसकी चर्चा पूरे देशभर हो रही है। कंगना ने यह मूवी देश में लगी इमरजेंसी पर बनाई है। जिसमें उन्होंने देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का रौल अदां किया है। रानौत ने इस फिल्म के माध्यम से लोगों को उस वक्त हुए अत्याचार को दिखाने की कोशिश की है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ सिख समुदाय के लोग भी इसका विरोध करते नजर आए हैं। सिखों ने कंगना पर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस फिल्म में सिखों को गलत तीरके से पेश किया गया है। जो हमरी रीयल छवि है उसे धूमिल करने की कोशिश की गई है।
कब लागू किया गया आपातकाल?
बता दें कि 12 जून 1975 यही वह तारीख थी। जिसने देश में आपातकाल लगाने की बुनियाद रखी। दरअसल, इसी दिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी को लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए गलत तौर-तरीके अपनाने का दोषी बताया और उनका चुनाव रद्द भी कर दिया था। इसके बाद इंदिरा गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। जहां शीर्ष अदालत ने उन्हें राहत देते हुए प्रधानमंत्री पद पर बने रहने की अनुमति दे दी। वहीं कई लोगों का आज भी ऐसा मानना है कि इंदिरा ने सत्ता जाने के डर से देश में इमरजेंसी लगाई थी।
देश में कब लागू हुई इमरजेंसी?
भारत में आपातकाल 25 जून 1975 को लगाया गया था। जो 21 मार्च 1977 यानी 21 महीने तक लागू रहा था। इस दौरान चुनाव स्थगित हो गए। वहीं लोगों के अधिकारों को भी समाप्त कर दिया गया था। इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक विरोधियों को जेल की सलाखों के पीछे करा दिया। वहीं सभी प्रेस संस्थानों की रातों रात लाइट काट दी गई और बैन कर दिया गया। इंदिरा के बेटे संजय गांधी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर पुरुष नसबंदी अभियान भी चलाया गया था। इस दिन को लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने 'भारतीय इतिहास की सबसे अधिक काली अवधि' कहा था।
इमरजेंसी का देश की राजनीति पर असर?
बता दें कि इंदिरा गांधी के आपातकाल लागू करने के दो साल बाद उनके विरोध का एक बड़ा जत्था पूरे देश तैयार हो गया था। इस बात की जानकारी जब इंदिरा को लगी तो उन्होंने लोकसभा भंग कर नए सिरे से चुनाव करने की अपील की। लेकिन इंदिरा का यह फैसला उनकी पार्टी और उनके लिए घातक साबित हुआ। सिफारिश का अंजाम ये निकला की खुद इंदिरा अपने रायबरेली सीट तक हार गईं। इंदिरा के खिलाफ देशभर में हुए विरोध प्रदर्शन का हासिल ये निकला कि,जनता पार्टी ने केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई और मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने। वहीं, संसद में कांग्रेस सदस्यों की संख्या 50 से घटकर 153 हो गई। भारतीय राजनीति का यह महत्वपूर्ण समय था। जो राजनीति के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। क्योंकि देश में 30 साल बाद पहली बार कोई गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी।