Home / लाइफस्टाइल / पितृ पक्ष में अलकनंदा सहित इन घटों पर करें पिंडदान, पितरों को मिलेगा मोक्ष
Videos_01

पितृ पक्ष में अलकनंदा सहित इन घटों पर करें पिंडदान, पितरों को मिलेगा मोक्ष

PITRA PAKSHA 2024: सनातन धर्म पर्वों का धर्म माना जाता है। इस धर्म में सालभर त्योहारों की भरमार रहती है। वहीं सनातन को मानने वाले लोग श्रद्धाभाव के साथ त्योहारों को मनाते भी हैं। हिंदू धर्म में बड़े पर्व जैसे होली, दिवाल, रक्षाबंधन आदि को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इन सब त्योहारों को मनाने के पीछे कुछ न कुछ पौराणिक कहानियां भी चलती है। जो इन त्यौहारों के पीछे के रहस्य को बताती हैं। ऐसे ही सनातन धर्म में पितृ पक्ष का बड़ा महत्व माना जाता है। यह भी हिंदुओं के लिए एक विशेष पर्व है। मान्यता है कि इस दौरान अपने पितरों का श्राद्ध करने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। वहीं श्राद्ध करने वालों को आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। घर परिवार में सुख समृद्धि आती है।

बता दें कि पंचाग के मुताबिक, इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत 17 सितंबर 2024 से होगी। वहीं इसकी अंतिम तिथि 2 अक्टूबर होगी। पितृ पक्ष 15 दिन तक चलेगा। आइए  जानते हैं पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध करने का विधि विधान।

इस पक्ष में हमें सुबह जल्दी उठना चाहिए इसके बाद स्नान कर साफ कपड़े पहनें। इसके बाद जल में  काले तिल मिलाकर सुर्य भगवान को जल चढ़ाए। जिससे आपके जीवन में सकारात्मता बढ़ेगी और सूर्य देव की असीम कृपा बनी रहेगी। वहीं अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनको भी अक्षत, जौ और काले तिल के साथ जल अर्पित करें। इसके बाद सदभावना के साथ भोजन बनाएं और पूर्व दिशा की तरफ मुख करके अपने पितरों को भोजन अर्पित करें। अंत में पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति के लिए भगवान से प्रार्थना करें और मंत्रों का जाप करें।

पिंडदान एक अहम कर्म

हिंदू धर्म में पिंडदान करना एक पुरानी परंपरा है। जो सदियों से चली आ रही है। पिंडदान करने के पीछे माना जाता है कि , ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनको मोक्ष की प्राप्ति होती है। बता दें कि परंपरा के अनुसार कुछ लोग पवित्र तीर्थ स्थानों पर अपने पितरों के पिंडदान करने के लिए जाते हैं तो बहुत से अपने घरों पर ही विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं। 

कौन- कौन से हैं पवित्र स्थान

जातक अपने पितरों का श्राद्ध करने के लिए अलग-अलग पवित्र स्थानों पर जाते हैं। लेकिन ज्योतिषाचार्य के अनुसार गंगा नदी के घाटों को पिंडदान के लिए सबसे पवित्र स्थान बताया है।

 बनारस

बनारस को देश का सबसे पुराना शहर माना जाता है। वहीं बनारस को बाबा महाकाल की नगरी भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहां जो भी  गंगा नदी के घाटों पर पिंडदान करता है। उसके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। क्योंकि काशी बाबा महाकल की नगरी के साथ साथ मोक्ष की नगरी भी मानी जाती है। 

बिहार की फाल्गु नदी

बिहार का गया धाम भक्तों की पावन भूमि है। यहां पर भी जातक अपने पितरों का पिंडदान करने के लिए भारी संख्या में आते हैं। मान्यता है कि फाल्गु नदी में भगवान विष्णु आज भी निवास करते हैं। जहां पिंडदान करने से पूर्वजों को खुशी मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

 हरिद्वार

उत्तराखंड का हरिद्वार भी देश के पवित्र स्थलों में से एक है। यहां भी गंगा का किनारा है। यहां भी पिंडदान करने वालों की भीड़ देखने को मिलती है। मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

बद्रीनाथ

ऐसे तो सनातन धर्म में चारों धामों की बड़ी मान्यता है। लेकिन बद्रीनाथ धाम पिंडदान के लिए भी पावन स्थल माना जाता है। जो अलकनंदा तट पर बसा है। माना जाता है यहां पिंडदान करना पूर्वजों को सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। जो जातक और पितर दोनों के लिए बेहद अच्छा और शुभ माना जाता है।

4.000
Fans
3.000
Followers
2.000
Subscribers
side-banner