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अतीक के उन तीन शूटरों के परिवार की कहानी, जिनके घर वालों को आहट से भी होती है घवराहट

UTTAR PRADESH;एक ऐसी घटना जिसको शूटरों ने पुलिस हिरासत में अंजाम दिया। एक कुख्यात गैंगस्टर और उसके भाई को शूट कर दिया। क्राइम की दुनिया का एक सरगना जिसके नाम से लोगों की धड़कने रुक जाती थी। जिसकी हत्या को सालभर से ज्यादा हो गया। जी हां हम बात कर रहें हैं उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर अतीक अहमद की। जिसकी हत्या पुलिस हिरासत में कर दी गई। अतीक का मर्डर पुलिस हिरासत में ही नहीं बल्कि सरेराह मीडिया कैमरे के सामने हुआ। यह ठीक वैसा ही था जैसे कोई फिल्म की शूटिंग चल रही हो। शायद ही पहले कभी ऐसा मर्डर हुआ होगा। जो मीडिया के लाइव कैमरे में  कैद किया गया हो।

लेकिन उत्तर प्रदेश के तीन घरों का हाल आज भी बेहाल है, तीन वे घर जिनके बच्चों ने अतीक अहमद और उसके भाई को गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। तीनों शूटर तो जेल में बंद हैं ही, वहीं इनके परिवार भी कैद जैसी जिंदगी काट रहे हैं।

अंजान से बात करने से बचते है घर वाले

बता दें कि इन तीन परिवार के लोगों का हाल कुछ ऐसा है कि ये किसी अंजान व्यक्ति से मिलने से कतराते हैं। किसी जानकार से मिलते वक्त नजरें चुराते हैं। इनके बच्चों ने जो किया है उसका खामियाजा ये परिवार भी भुगत रहे हैं। इनके दरवाजे की कुंडी कोई अंजान शख्स खटखटाए या आवाज दे तो ये दरवाजा खोलते नहीं बल्कि कुंडी लगा लेते हैं। जानकारी के मुताबिक इस बात की पुष्टी एक खास मीडिया ने की है। जब मीडिया एक शूटर के घर कासगंज पहुंचा तो दरवाजा नहीं खोला। लेकिन मीडिया ने अपनी पूरी जानकारी देकर गांव वालों की मदद से दरवाजा खुलावाया। गांव वालों के साथ अंजान चेहरे देखकर एक अधेड़ उम्र की मां ने अधबंद दरवाजे की ओट से कहा कि आप लोग हमसे सवाल पूछकर चले जाएंगे। और हम बचे-खुचे भी तबाह हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि 'इतनी रात में आने का क्या मतलब है। घर में छोटे बच्चे हैं, बिजली भी गुल है तुम जाओ।'

कासगंज की ये अम्मा अतीक के शूटरों में से एक की मां है। अम्मा से बहुत मनुहार के बाद गेट तो खुला मगर जुबान नहीं। जानकारी के मुताबिक ये शूटर जुर्म की दुनिया में कोई बड़ा नाम नहीं थे। लेकिन बड़ा नाम करने के लिए उन्होंने ऐसा काम किया। वे तो जेल में कैद हैं लेकिन उनके परिवार प्रदेश के तीन जिलों में अंडरग्राउंड जिदंगी जी रहे हैं। तीनों परिवार के लोगों का हाल ये है कि ये नए चेहरे से डरते हैं तो पुराने से बचते हैं।

सीधे-सादे लोग

उत्तर प्रदेश के जिला हमीरपुर का वो गांव जहां से शूटर सनी की कहानी शुरू होती है। इस गांव में जब मीडिया ने एंट्री की तो सनी के घर तक पहुंचाने का जिम्मा एक स्थानीय शख्स ने लिया। वहीं इसके बाद उसने कहा कि बहुत सीधे-सादे लोग हैं। चीटीं मारने से भी डरते हैं। अब इतने बड़े कांड में फंस गए हैं। फिर कुछ देर बाद कहा कि  काम छूटने से भाई शराबी हो गया अब हाल ये है कि बच्चे भूखे मरते हैं। कोई बात करने भी चला जाए तो पैसा मांगने लगते हैं। लेकिन मुंह नहीं खोलता आप भी परख लीजिए।

जब मीडिया उनके घर पहुंची तो शूटर सनी के भाई ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि हमें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि क्या हुआ क्या नहीं। जब यह घटना हुई उसके बाद समाचार के जरिए हमें पता चला कि कुछ बड़ा कांड हुआ है। इसके बाद पुलिस पूछताछ के लिए घर आई और उसके बाद सनी के घर पर करीब एक साल रही, जो कि हमारी सेफ्टी के लिए थी।

उन्होंने सनी को लेकर बताया कि सनी बचपन से ही गुस्सैल था। बचपन में उसको एकबार डांट दिया था तब से वह घर भाग गया और बाहर ही रहने लगा। और फिर कभी वापस नहीं लौटा। लेकिन इस बात का भी भरोसा नहीं होता कि वह ऐसा भी कर डालेगा।

भाई ने बताई मुलाकात की बात

वहीं भाई ने सनी से जेल की मुलाकात के बारे बताते हुए कहा कि पिछले महीने मिलने गए थे। लेकिन कुछ खास बात नहीं हुई। बस सनी ने इतना ही कहा कि संभलकर रहना। बाहर आना-जाना कम करना और बाल-बच्चों को देखते रहना। जमाना बहुत खराब है। यह सुनकर हमको रोना आ गया कि कांड तो तुमने कर दिया। अब जमाना क्या खराब है! 

वहीं शूटर के भाई ने बताया कि घर का खर्च भी बड़ी मुश्किलों से चल रहा है। सब कुछ बेच-बूच दिया है। जब पुलिस वाले साथ रहते थे तो काम पर चला जाता था। लेकिन अब तो सब उधार पर चल रहा है। पहले तो कुछ रिश्तेदारों से मदद मिल जाती थी। लेकिन अब तो वह भी नहीं मिल रही। और वैसे भी हमेशा कौन किसकी मदद करता है। जैसे-तैसे गुजारा हो रहा है। बच्चों की फीस भी नहीं दे पा रहे हैं।

वहीं मीडिया ने सनी के भाई से पूछा कि तीनों शूटरों पर जिगाना पिस्टल बरामद हुई थी। जिसकी कीमत 5 लाख रुपये है। जो तुर्की में बनाई जाती है। लेकिन इस पर कोई जबाव नहीं दिया और भड़कते हुए कहा कि हमें सनी के बारे में कुछ नहीं पता कि उसने क्या किया है, जो किया है वही जाने।

बहुत शांत प्रवृत्ति का था लवलेश

शूटर लवलेश तिवारी जो बांदा जिले का रहने वाला है। उसके भाई वेद से बातचीत हुई तो बताया कि लवलेश भाई लखनऊ से ग्रेजुएशन कर रहा था। लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी और घर आना-जाना भी कम कर दिया था। वहीं वेद ने अपने बारे में बताते हुए कहा कि मैं ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर में था। लेकिन घर के हालात सही नहीं होने के कारण पढ़ाई छोड़ दी और एक मॉल में नौकरी कर रहा हूं। कुछ खर्चा बड़े भाई दे देते हैं। फिलहाल ऐसी ही काम चल रहा है।

वहीं एक पड़ोसी वकील बताते हैं कि, लवलेश की उम्र जब चार साल की थी तब से जानते हैं। बहुत ही शांत रहता था और अपना काम से काम रखता था। किसी से कोई तीन-पांच नहीं, बहुत ही सीधा-सादा था। माता-पिता भी बहुत ही नेक दिल और सरल इंसान हैं।

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