लेह से पैदल आ रहे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने क्यों लिया हिरासत में, क्या है पूरा मामला ?
journo sam, October 01, 2024DELHI : दिल्ली पुलिस ने सोमवार रात शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक समेत करीब 150 लोगों को शहर की सीमा पर हिरासत में ले लिया है। वांगचुक और उनके साथी लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लद्दाख से दिल्ली तक मार्च कर रहे थे। जहां उन्हें शहर के सिंघु बार्डर से हिरासत में लिया गया है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, शहर में निषेधाज्ञा लागू होने के कारण उन्हें वापस जाने के लिए कहा गया, लेकिन जब वे नहीं रुके। जिसके बाद सीमा पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
बता दें कि जलवायु कार्यकर्ता ने अपनी हिरासत की जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा है कि लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने के लिए दिल्ली तक यात्रा कर रहे स्वयंसेवकों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
कौन हैं सोनम वांगचुक ?
सोनम वांगचुक शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता हैं। इनका जन्म 1 सितंबर 1966 को अलची, लद्दाख में हुआ था। वह स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) के संस्थापक-निदेशक हैं. 1993 से 2005 तक वांगचुक ने लैंडेग्स मेलॉग, जो लद्दाख की एकमात्र प्रिंटिंग पत्रिका है की स्थापना की और संपादक के रूप में कार्य किया. शिक्षा में मैकेनिकल इंजीनियर वांगचुक 30 से अधिक वर्षों से शिक्षा सुधार के क्षेत्र में काम कर रहे हैं.
थ्री इडियट फिल्म से हुए मशहूर
बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की फिल्म “थ्री इडियट” सोनम वांगचुक के जीवन से प्रेरित थी. इस फिल्म के बाद वह चर्चा में आए. एनआईटी श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले सोनम वांगचुक शिक्षा में सुधार और लद्दाख तथा देश के विकास के लिए काम कर रहे हैं. वांगचुक ने कई आविष्कार किए हैं, जिनमें सोलर हीटेड मिलिट्री टेंट, आर्टिफिशियल ग्लेशियर और एसईसीएमओएल (SECMOL) परिसर का डिज़ाइन शामिल हैं.
क्या है मांग ?
बता दें कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया गया। जिसमें लद्दाख को बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश बना दिया। इससे वहां का विशेष दर्जा खत्म हो गया। वहीं केंद्र शासित प्रदेश के निर्माण ने उन्हें विधायिका के बिना ही छोड़ दिया। जिससे वे स्वायत्तता से वंचित हो गए। शासन में सरकारी नौकरियों और भूमि अधिकारों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व की मांग और छठी अनुसूची के अलावा पूर्ण राज्य की मांग और लद्दाख में एक और संसदीय सीट को बढ़ाना आंदोलनकारियों के मांग में शामिल है। जिसको लेकर लद्दाख के लोग 2019 से ही मांग कर रहे हैं। वहीं इसका नेतृत्व सोनम वांगचुक कर रहे हैं। इससे पहले भी सोनम मार्च में 21 दिन का भूख हड़ताल कर चुके हैं।
सरकार का वादा नहीं हुआ पूरा
बता दें कि बीजेपी ने साल 2019 के अपने चुनावी घोषणापत्र में और बीते वर्ष लद्दाख हिल काउंसिल चुनाव के में भी लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने का वादा किया था। लेकिन वह वाद पूरा नहीं हुआ। जिसको लेकर लोगों में नाराजगी है। इस आंदोलन को लेकर सोनम वांगचुक की केंद्र सरकार से बातचीत भी चल रही थी। लेकिन वह किसी कारणवश सफल नहीं हो पाई। 26 अगस्त को केंद्र सरकार ने घोषणा किया था कि लद्दाख में 5 नए जिले बनाए जा रहे हैं। इसे जोड़कर अब वहां कुल सात जिले हो जाएंगे। लेह और कारगिल के अलावा पांच नए जिलों का नाम ज़ांस्कर, द्रास, शाम, नुब्रा और चांगथांग होगें। वहीं सरकार के इस फैसले के पीछे इस आंदोलन को ही कारण माना गया था।