जानिए 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव का सियासी हाल, किसने कितनी सीटें जीतकर किया था कमाल
सचिन मुखी, September 03, 2024
HARYANA; हरियाणा विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा होने के बाद प्रदेश में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। सभी दलों ने चुनावी रण में उतरने के लिए कमर कस ली है। वहीं अपने अपने उम्मीदवार तय करने की कवायद भी जारी है। सभी दल इसके लेकर बैठक भी कर रहे हैं। इसका परिणाम 8 अक्टूबर को आएगा। इसके बाद पता चलेगा कि किसने कहां से जीती है पारी? किसके हिस्से में जीत आई तो किसने किया हार का सामना और कौन हारते हारते जीता?
बता दें कि चुनावों में लोगों की दिलचस्प उन सीटों पर भी रहती है। जहां उम्मीदवार कुछ मतों से मुकाबला जीतते हैं। वहीं दूसरी ओर कई सीटें ऐसी भी होती हैं। जहां प्रत्याशी बड़े मतों के अंतर से चुनाव में एक तरफा जीत हासिल करते हैं। आइए जानते हैं 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव के बारे में कौन सबसे पीछे रहा और किसने सबसे ज्यादा अंतर से जीत दर्ज की।
कैसे थे 2019 के नतीजे?
पिछले हरियाणा विधानसभा चुनाव में 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को सबसे ज्यादा 40 सीटें मिली थीं। कांग्रेस 31 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी बनी थी। विधानसभा चुनाव में JJP 10 सीटें जीतने में सफल रही थी। सात निर्दलीय, इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) एक और हरियाणा लोकहित पार्टी को एक सीट पर जीत मिली थी।
बता दें कि सत्ताधारी भाजपा बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई थी। 90 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 46 सीटों पर जीत जरूरी थी। चुनाव के बाद 10 सीटों वाली जजपा के साथ पार्टी ने गठबंधन किया था। जिसके बाद भाजपा ने राज्य की सत्ता में वापसी की। 27 अक्तूबर, 2019 को मनोहर लाल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। किंग मेकर बने दुष्यंत चौटाला ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
सबसे कम अंतर वाली सीटें?
बीते 2019 के विधानसभा चुनाव में 1000 से कम अंतर वाली तीन सीटें थीं। ये सीटें थीं सिरसा, पुन्हाना और थानेसर। भाजपा, कांग्रेस और हरियाणा लोक हित पार्टी के हिस्से में एक-एक सीट गई थी।
चुनाव में सात सीटें ऐसी रहीं जहां जीत का अंतर 1000 से 2000 वोटों के बीच था। इनमें से चार सीटों पर कांग्रेस जबकि तीन सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। ये सात सीटें थीं- रतिया (एससी), कैथल, रेवाड़ी, यमुनानगर, खरखौदा (एससी), मुलाना (एससी) और असंध।
इन सीटों पर था 2 से 5 हजार वोटों का अंतर
पिछले विधानसभा चुनाव में 15 सीटें ऐसी रहीं जहां जीत का अंतर 2000 से 5000 वोटों के बीच था। इनमें से सात सीटों पर कांग्रेस, पांच सीटों पर भाजपा, दो सीटों पर जजपा और एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली थी। ये सीटें बड़खल, राय हथीन, फतेहाबाद, होडल (एससी), नीलोखेड़ी (एससी), रादौर, रोहतक, फरीदाबाद एनआईटी, सफीदों, नूंह, गोहाना, बरोदा, बरवाला और गुहला (एससी) थीं।
इन सीटों पर रहा 5 से 10 हजार वोटों का अंतर
2019 में हुए विधानसभा चुनाव की सात सीटें ऐसी रहीं जहां जीत का अंतर 5 से 10 हजार वोटों के बीच था। इनमें से छह सीटों पर भाजपा और बची हुई एक सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी को सफलता मिली थी।
सबसे कम अंतर से जीत वाली सीट
पिछले हरियाणा विधानसभा चुनाव में एक हजार से कम अंतर वाली तीन सीटें थीं। सबसे कम अंतर वाली जीत सिरसा सीट पर हुई थी। जहां हरियाणा लोक हित पार्टी के गोपाल कांडा केवल 602 वोटों से चुनाव जीते थे। दूसरी सबसे कम अंतर वाली जीत गुरुग्राम जिले के पुन्हाना सीट पर देखने को मिली थी। यहां कांग्रेस के प्रत्याशी मोहम्मद इलियास 816 वोटों से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। वहीं तीसरी सबसे छोटी जीत कुरुक्षेत्र जिले की थानेसर सीट पर हुई थी। यहां भाजपा प्रत्याशी सुभाष सुधा को 842 वोटों से जीत मिली थी।
किसने हासिल की सबसे बड़ी जीत?
2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में पांच सबसे बड़ी जीतों की बात करें तो इनमें दो सीटें BJP और JJP तो एक सीट कांग्रेस के खाते में गई थी। सबसे बड़ी जीत करने वाले कांग्रेस के भूपेंद्र सिंह हुड्डा थे। रोहतक जिले की गढ़ी सांपला-किलोई सीट से पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा 58,312 वोटों के अंतर से चुनाव जीतने में कामयाब हुए थे। इसके बाद फतेहाबाद जिले की टोहना सीट से JJP के देवेंदर बबली 52,302 वोटों से चुनाव जीते थे।
वहीं तीसरी सबसे बड़ी जीत पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के नाम रही थी। जींद जिले की उचाना कलां सीट से उतरे दुष्यंत 47,452 मतों से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
इसके बाद चौथी सबसे बड़ी जीत हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने नाम दर्ज की थी। करनाल सीट से उतरे भाजपा के मनोहर लाल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 45,188 मतों से हराया था।
पांचवीं सबसे बड़ी जीत भाजपा के मूलचंद शर्मा ने हासिल की। फरीदाबाद जिले की बल्लभगढ़ सीट पर मूलचंद 41,713 मतों से चुनाव जीते थे।