राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विचारक गोपाल जी व्यास का निधन RSS में कई महत्वपूर्ण पदों पर किया काम
journo sam, November 08, 2024गोपाल जी व्यास पर आलेख हुआ प्रकाशित।
डा.राकेश मिश्र ने डाला जीवन पर प्रकाश।
डा.मिश्र के बेहद करीब थे गोपाल जी व्यास।
देहदान कर अमर हो गए गोपाल जी व्यास।
आदर्श स्वयंसेवक, पूर्व राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता श्रीयुत् श्री गोपाल जी व्यास का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया...उन्होंने 93 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। गोपाल जी व्यास का जन्म 15 फरवरी 1932 में रायपुर में हुआ था। उन्होंने जबलपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री ली और फिर भिलाई स्टील प्लांट में सीनियर इंजीनियर के तौर पर सेवाएं दीं...खास बात ये है कि वे बचपन से ही संघ के स्वयंसेवक बने इसके बाद श्रीगोपाल जी ने प्रांत कार्यवाह, प्रांत प्रचारक, क्षेत्र प्रचारक जैसे बड़ो पदों पर काम कर अपनी काबिलियत का लौहा मनवाया...लेकिन जब वे भिलाई स्टील प्लांट में काम करते थे, तब प्रान्त के कार्यवाह भी रहे...फिर नौकरी से वीआरएस लेकर उन्होंने पूरा जीवन संघ की सेवा में समर्पित कर दिया। वे महाकौशल प्रान्त के प्रांत प्रचारक भी रहे..वे विश्व हिन्दू परिषद के अखिल भारतीय सयुंक्त महामंत्री रहे। संघ में कई पदों पर किया बेहतरीन काम। जबलपुर से की अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई। भिलाई स्टील प्लांट में रहे सीनियर इंजीनियर। ईश्वर दिवंगत आत्मा को मोक्ष प्रदान करें-राकेश मिश्र सबसे गहरी ये है कि व्यास जी ने संघ कार्य विस्तार के लिए जबलपुर से रायपुर तक की पैदल यात्रा भी की...संघ गांव-गांव, घर-घर पहुंचे, इसके लिए हमेशा प्रयास करते रहे...साल 1975 से लेकर 1977 तक वे आपातकाल में जेल में रहे। आपातकाल में जेल में रहते ही उन्होंने वकालत की पढ़ाई की। उनका पूरा जीवन त्यागमय था। वे अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने कभी परिस्थितियों के साथ समझौता नहीं किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को उन्होंने हमेशा अपने जीवन में सर्वोच्च माना। उनके पास केवल दो ही कार्य थे, एक नौकरी और दूसरा संघ के लिए कार्य करना। उनके साथ कार्य कर चुके लोग उन्हें सन्त के रूप में याद करते हैं। वे मिलनसार थे। जिससे भी मिलते थे तो बड़े प्रेम से मिलते थे। लोगों को कभी ये नहीं लगता था कि वे पहली बार उनसे मिल रहे हैं। वे संघ के अथक सेवाधारी स्वयंसेवक थे...वे साल 2006 से 2012 तक छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के सदस्य भी रहे। दिल्ली में राज्यसभा में उनके साथ छह वर्ष तक मेरा निकट का संबंध रहा। मैंने उनके जैसी सादगी नहीं देखी। उदार दिल, सादगी की मिसाल तो उनके अंदर कूट कूट कर भरी थी। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर होते हुये भी वह सदैव अपना वेतन व भत्ते दूसरों पर खर्च कर देते थे। प्रचारक जीवन में बेटे मुन्नू को असमय खो दिया।आदरणीय सुशीला भाभी, बहू व पोता हर्ष व्यास से दो दिन पूर्व मेरी बात हुई थी, तब उन्होंने बताया कि बाबा गंभीर बीमार हैं। शायद अब नहीं बचेंगे। सुनकर मुझे बड़ा धक्का लगा। प्रकृति की नियति भी यहीं तक होगी। उनके साथ मेरा 1990 से विद्यार्थी परिषद के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में जो मार्गदर्शन मिला, उस पर आज भी क़ायम हूं।