बिहार की धरती पर खाक छान रहे पीके ने विपक्षियों को दिया करारा जबाव, जानिए क्यों कहा जन सुराज जनता की बी टीम?
सचिन मुखी, September 11, 2024BIHAR: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने उन सभी लोगों को करारा जवाब दिया है। जो जन सुराज या उन्हें किसी न किसी दल की बी टीम कहते हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस दौरान उन्होंने कहा कि राजद के लोग हमें भाजपा की बी टीम कहते हैं। जबकि भाजपा को पिछले विधानसभा चुनाव में मात्र 19 प्रतिशत वोट ही मिले हैं। बिहार में भाजपा का अपना कोई वजूद नहीं हैं। तभी तो उन्होंने केवल 42 सीटें जीतने वाले नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बना रखा है। हाल ही के दिनों में भाजपा दूसरे राज्यों में दलों को तोड़ कर अपनी सरकार बनाने के लिए जानी जाती है। बी टीम उसका बना जाता है जो मज़बूत होती है और बिहार में तो भाजपा खुद ही कमज़ोर है। भाजपा का यहाँ पर न तो कोई नेता है और न ही उनकी बिहार के लिए कोई नीति है। जबकि भाजपा के नेता हमें राजद की बी टीम कहते हैं। वहीं प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज जनता की बी टीम है।
पलायन बड़ी समस्या
पीके ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को घेरते हुए कहा कि कुछ सांसदों के लिए बिहार में पहले लालू के समय जंगल राज और अब नीतीश के समय अफसर राज को दोनों ही दलों ने पनपने दिया। क्या उन्हें नहीं पता की बिहार देश का सबसे गरीब राज्य है, क्या उन्हें नहीं पता बिहार में पलायन सबसे बड़ी संख्या में होता है। जो प्रदेश के लिए बड़ी समस्या है।
9 वीं फेल को बनाया उप-मुख्यमंत्री
वहीं प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव को चुनौती भी देदी। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव अब भी 10वीं पास कर लेंगे तो फिर वह उन्हें 9वीं फेल नहीं कहेंगे। उसके बाद उन्हें 10वीं पास कहेंगे। उन्होंने कहा की लोग मुझसे पूछते है कि आप तेजस्वी को 9वीं फेल क्यों कहते है? मुझको यह बात समझ नहीं आती की इसमें गलत क्या है? 9वीं फेल व्यक्ति को 9वीं फेल ही कहेंगे। जैसे डॉक्टर इंजीनियर को हम डॉक्टर इंजीनियर कहते हैं। उन्हें तो 9वीं फेल कोई नहीं बुलाता। उन्होंने तेजस्वी के वायरल बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा जिसमें तेजस्वी यादव ने कहा था कि 'हम इतने ईमानदार है कि माँ- बाबूजी मुख्यमंत्री थे तब हम जाली डिग्री बना सकते थे लेकिन हमने नहीं बनवाई'। वहीं इस बयान पर प्रशांत किशोर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्होंने जाली डिग्री नहीं बनवाई यह बात ऐसे बताते हैं जैसे हम पर कोई एहसान किया हो। जाली डिग्री नहीं बनाने के लिए जनता को जैसे उनका आभार व्यक्त करना चाहिए। इस तरह के बयान से उनकी शिक्षा के प्रति सोच कैसी है यह साफ हो जाता है। जबकि मैं तो यह कहुंगा कि उन्हें बिहार की जनता का आभार व्यक्त करना चाहिए। क्योंकि उन्होंने 9वीं फेल व्यक्ति को बिहार का उप-मुख्यमंत्री बना दिया।
बिहार की धरती पर खाक छान रहे पीके
बता दें कि प्रशांत किशोर 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन एक करोड़ लोगों के साथ अपनी पार्टी की नीव रखने वाले हैं। जिसको लेकर पीके बिहार की धरती पर पैदल यात्रा कर रहे हैं। वह लोगों के बीच में जाकर गांव, कस्बों और शहरों की खाक छान रहे हैं। इस यात्रा करीब 650 दिन से अधिक हो चुके हैं।
पीके का दावा
बता दें कि प्रशांत किशोर की पैदल यात्रा अबतक बिहार के करीब 235 ब्लॉकों के 1319 पंचायचों के 2697 गांवों को कवर कर चुकी है। वहीं पीके ने लोगों से उनका हाल जानकर कहा कि कुशासन से परेशन जनता बिहार में बदलाव चाहती है। वहीं उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को जन सुराज में कहीं न कहीं एक विकल्प नजर आ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सभी 243 सीट पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। लेकिन इससे पहले वो लिटमस टेस्ट के लिए अगले कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा उपचुनाव में भी किस्मत आजमाएंगे। इसकी घोषणा भी उन्होंने की है।
ये नेता होंगे पीके की पार्टी में शामिल
पार्टी बनाने की घोषणा के बाद से पीके के साथ पांच बार सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे आरजेडी नेता देवेंद्र प्रसाद यादव, जेडीयू के पूर्व सांसद मुनाजिर हसन, आरजेडी के पूर्व एमएलसी रामबली सिंह चंद्रवंशी और पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की पोती डॉक्टर जागृति जैसे लोगों के साथ-साथ कुछ पूर्व नौकरशाहों ने भी पीके का दामन थामा है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि पीके का हाथ थामने वाले अधिकांश नेता अपनी ही पार्टियों में हाशिए पर चल रहे थे। पीके दरअसल बिहार की राजनीति में एनडीए और महागठबंधन के बाद खुद को तीसरे विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश में लगे हुए हैं। इसके लिए उन्हें इन्ही दलों के नेताओं से आस है। पीके इन नेताओं के जरिए इन दलों के वोट बैंक में तोड़फोड़ करने की तैयारी कर रहे हैं।
जानिए पीके की विचारधार
बता दें कि पीके ने अपनी पदयात्रा गांधी जयंती के दिन शुरू की थी। वहीं पार्टी का गठन भी गांधी जयंती के दिन ही करने वाले हैं। लेकिन उन्होंने अपनी विचारधारा और पार्टी की नीतियों को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है। बातचीत में पीके गांधी, आंबेडकर, लोहिया और जेपी की विचारधारा की बात करते रहते हैं। जिस अनुपात में पीके मुसलमानों को टिकट देने की बात कर रहे हैं। उससे लोहियावादी समाजवादियों के उस नारे की झलक देखने को मिल रही है, 'जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उतनी उसकी भागीदारी'। इसके अलावा पीके अपने भाषणों में राज्य के पलायन, गरीबी, बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठाकर लोगों से जुड़ने की कोशिश करते नजर आते हैं। बता दें कि बिहार में दूसरे दलों का वोट काटकर अपनी राजनीति चमकाने की पुरानी कवायद रहीं है। इस नियम को पहले भी कई पार्टियों ने अपनाया है। लेकिन यह अलग बात है कि किसी को सफलता नहीं मिली। अब यह आने वाला वक्त ही तय करेगा कि बिहार की चुनावी राजनीति में प्रशांत किशोर को कितनी सफलता मिलेगी।