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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में किसका पलड़ा भारी? महायुति या MVA में कौन मारेगा बाज़ी !

 महाराष्ट्र: सत्तासीन गठबंधन और विपक्षी गठबंधन के बीच 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर है। ऐसा ओपिनियन पोल के परिणाम से सामने आया है।  सत्तारूढ़ भाजपा और शिंदे सेना की महायुति जीत के लिए पूरा ज़ोर लगा रही है और उनका पलड़ा ६ फीसदी से भारी है।  उन्हें 47 फीसदी वोट मिलने की उम्मीद है । वहीं  उद्धव की शिवसेना,   राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, और इंडियन नेशनल कांग्रेस के महाविकास अघाड़ी  गठबंधन भी अपनी जीत की आस लगाए बैठे हैं। उन्हें 41 फीसदी मत मिलने की आशा है।

ओपिनियन  पोल

महयुति को 145 से 165 मत, जबकि महाविकास अघाड़ी गठजोड़ को 106 से 126 वोट मिलने का अनुमान है। दोनों गठबंधनों के उम्मीदवारों ने चुनावी प्रचार ज़ोर-शोर से शुरू कर दिए हैं। ग़ौरतलब है कि 23 नवंबर को मतगणना के बाद नतीजे सामने आने के बाद दोनों गठजोड़ों के उम्मीदवारों के दावों की असलियत सामने आ जाएगी। 

महायुति और MVA में घमासान

वर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्षी गठजोड़ पर निशाना साधते हुए कहा कि वे केवल बातों के ही धनी हैं। असली धनी तो हमारी सरकार है जिसने कांग्रेस की तरह “लाडली बहना” योजना के तहत बहनों को 3000 तक देने का सिर्फ वादा ही नहीं किया परन्तु इसके लिए कदम भी उठाये हैं ।  उन्होंने कहा कि हमने न केवल वादे किये बल्कि लड़कियों को मुफ्त शिक्षा, 3 मुफ्त गैस सिलिंडर और किसानों के कर्ज़ माफ़ी के लिए भी सकारात्मक कदम उठाये हैं।  साथ ही उन्होंने विपक्ष द्वारा इन योजनाओं के विरोध पर खेद जताया है।

वहीं उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर 2022 में हमारी सरकार न गिरी होती तो हम किसानों के ऋण माफ़ कर देते । शिंदे सेना के भाजपा के साथ आ जाने से महायुति की सरकार एकनाथ शिंदे के अगुवाई में सत्ता में आई। इस गठजोड़ में अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी शामिल है।

चुनावी  मुद्दों  को  लेकर  जारी  आरोप  प्रत्यारोप

दोनों गठजोड़ों के उम्मदवारो के बीच आरोप प्रत्यारोपों का दौर जारी है और चुनाव हो जाने तक यह सिलसिला थमता नज़र नहीं आता। जहाँ महायुति हिंदुत्व और राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सामने आयी है वहीं एमवीए क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर आगे बढ़ रही है।  केंद्रीय सरकार की बीजेपी का साथ होने से शिंदे सेना अपनी मजबूती दिखा रही है, वहीं उद्धव सेना कोंकण की समृद्धि का वास्ता देकर मतदाताओं से वोट मांग रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने कहा कि वो सभी बड़ी परियोजनाओं के गुजरात भेजे जाने से नाराज़ हैं और इस तरह से महाराष्ट्र का विकास दांव पर लगा है ।

दूसरी तरफ सत्तासीन गठबंधन के प्रमुख मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि विपक्षी पार्टी पर भरोसा करना नामुमकिन है क्योंकि उन्होंने पहले भी मुफ्त बिजली का वादा किया और चुनाव के बाद तोड़ दिया, जबकि उनकी सरकार ज़ीरो बिल पर बिजली दे रही है । “बटेंगे तो कटेंगे” और “एक हैं तो सेफ हैं” को भी पॉज़िटिव तरीके से लेने की बात कही  है और एकजुट होकर ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को मतदान में भाग लेने के लिये आग्रह किया है।

वहीं उद्धव ठाकरे के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए शिंदे ने कहा कि उन्हें चुनाव आयोग के अधिकारियों द्वारा बैग चेकिंग से किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए । केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, डिप्टी सीएम अजीत पवार, डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस समेत उनका भी बैग चेक किया गया ।  यह तो चुनाव आयोग के अधिकारियों का काम है और उन पर आरोप लगाना सरासर गलत है।   उन्होंने कहा कि वे अपना काम कर रहे हैं और हम अपना।

क्या  होगा  अंजाम ?

आपको बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों में से 75 सीटें कोंकण से हैं, जिनमे से 36 सीटें मुंबई में हैं।  कोंकण क्षेत्र के सावंतवाड़ी से एमवीए के राजन तेली और महायुति के दीपक कासकर को खड़ा किया गया है।  दोनों ही पार्टियों के मुख्य नेता चुनावी सभाओं को सम्बोधित कर रहे हैं और अपने चुनावी मुद्दों से मतदाताओं को लुभाने की पुरज़ोर कोशिश भी कर रहे हैं।  उनकी तैयारी कैसी है और मतदाताओं को किसके मुद्दे ज्यादा लुभा रहे हैं, यह तो २३ के चुनावी परिणाम ही बताएंगे। 

उसके पहले तक हम अपने मंतव्य ही दे सकते हैं और पार्टियों के दावों का विश्लेषण कर सकते हैं।  असली जंग तो 20 को मतदान के दौरान होगी और 23 के नतीजे ही उम्मीदवारों और महराष्ट्र का भाग्य निर्धारित करेंगे। 

 

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